अहोई अष्टमी व्रत माताओं द्वारा अपनी संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत हर साल कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन माताएं निर्जला उपवास रखती हैं और शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं।
*अहोई अष्टमी व्रत की पूजा विधि:*
– सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और व्रत का संकल्प लें।
– घर की दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं या स्थापित करें।
– दीपक जलाकर अहोई माता की पूजा करें और उन्हें हलवा, पूरी, फल और फूल अर्पित करें।
– अहोई अष्टमी की कथा सुनें या पढ़ें।
– शाम को तारों को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।
*अहोई अष्टमी व्रत का महत्व:*
– इस व्रत को रखने से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना पूरी होती है।
– माताएं अपनी संतान के मंगल की कामना के लिए अहोई माता की पूजा करती हैं।
– यह व्रत माताओं को अपनी संतान के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को दर्शाने का अवसर प्रदान करता है।
*अहोई अष्टमी व्रत की कथा:*
अहोई अष्टमी व्रत की कथा के अनुसार, एक स्त्री ने जंगल में मिट्टी खोदते समय एक शावक को मार दिया था। इस पाप के कारण उसके पुत्रों की मृत्यु हो गई। तब उसने अहोई माता की पूजा की और अपने पुत्रों के जीवन की कामना की। अहोई माता की कृपा से उसके पुत्रों को जीवनदान मिला। तभी से यह व्रत संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए रखा जाने लगा।
