*देहरादून**15 फरवरी 2026 से उत्तराखंड में वनाग्नि सीजन शुरू होने के बाद से अब तक कुल 309 घटनाएं दर्ज की गई हैं *इनमें 257 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है* *यह जानकारी मुख्य वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन, सुशांत कुमार पटनायक, IFS ने दी*
*गढ़वाल मंडल में सबसे ज्यादा आग*कुल 309 घटनाओं में से 227 अकेले गढ़वाल मंडल में हुई हैं* *कुमाऊं मंडल में 50 और वन्यजीव क्षेत्रों में 32 घटनाएं दर्ज की गईं* *सबसे ज्यादा प्रभावित जिले चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और पौड़ी गढ़वाल रहे* *बद्रीनाथ डिवीजन, रुद्रप्रयाग, केदारनाथ डिवीजन, पिथौरागढ़ और चकराता में आग की घटनाएं अधिक दर्ज की गईं*
*बद्रीनाथ में फायर वाचर की मौत, विभाग ने जताया शोक*सुशांत कुमार पटनायक ने बताया कि चमोली जिले के बद्रीनाथ में कल आग बुझाने के दौरान एक फायर वाचर की दुर्घटनावश गिरने से मृत्यु हो गई* *उन्होंने कहा कि विभाग पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है* *बीमा राशि और SDRF से मिलने वाली सहायता राशि के लिए कार्रवाई की जा रही है*
*अभी तक बड़ी संपदा हानि नहीं *CCF पटनायक के अनुसार वर्तमान में पशु हानि या बड़े स्तर पर वन संपदा की हानि की कोई घटना नहीं हुई है* *प्रभावित वन क्षेत्रों में यदि कोई हानि हुई है तो उसका आकलन किया जाएगा*
*15 फरवरी से 30 जून तक फायर सीजन* 📅 *उन्होंने बताया कि आधिकारिक तौर पर 15 फरवरी से 30 जून तक या मानसून आने तक की अवधि को फायर सीजन माना जाता है* *इस दौरान वन विभाग पूरी तरह से अलर्ट पर है*
*कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय, 300 अलर्ट दर्ज* 📞 *वन मुख्यालय में इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर संचालित है* *1926 हेल्पलाइन पर भी सूचनाएं मिल रही हैं* *मास्टर कंट्रोल रूम और डिविजनल हेडक्वार्टर स्तर पर टीमें तैनात हैं* *क्विक रिस्पांस टीम के माध्यम से घटनाओं को अटेंड किया जा रहा है* *अब तक 300 फायर अलर्ट दर्ज हुए हैं* *121 अलर्ट क्लोज कर दिए गए हैं और 111 अलर्ट पर स्टाफ मौके पर आग नियंत्रण में जुटा है*
*अन्य विभागों से समन्वय *आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF, जिला प्रशासन, पुलिस, संचार और स्वास्थ्य विभाग से लगातार समन्वय किया जा रहा है* *जरूरत पड़ने पर इन विभागों का सहयोग लिया जा रहा है*
*इस साल अधिक घटनाओं की आशंका थी**CCF पटनायक ने बताया कि इस साल बरसात कम हुई है और उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमपात भी कम हुआ है* *पिछले 10 साल के आंकड़ों के अनुसार हर अल्टरनेट साल में वनाग्नि की घटनाएं बढ़ती हैं* *पिछले साल आग की घटनाएं न्यूनतम थीं, इसलिए इस साल अधिक घटनाओं की आशंका थी* *इसी को देखते हुए रिस्पांस सिस्टम पूरी तरह एक्टिवेट किया गया है*
*कारण* 👉 *अधिकतर वनाग्नि की घटनाएं मानव जनित या दुर्घटनावश होती हैं* *कुछ प्राकृतिक कारणों से भी आग लगती है* *विभाग पूरी तैयारियों के साथ स्थिति पर नजर रखे हुए है*
