बदरीनाथ धाम में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। अब आम श्रद्धालु और वीआईपी एक लाइन में खड़े होकर दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश करेंगे। अब इसको लेकर प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई है। चारधाम यात्रा शुरू होने के बाद से देश- विदेश से बड़ी संख्या मे श्रद्धालुओं के उत्तराखंड पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। ऐसे में तीर्थयात्रियों को चारधाम यात्रा के दौरान क्राउड मैनेजमेंट, पार्किंग को परेशानियों का भी सामना भी करना पड़ रहा है।

बदरीनाथ धाम में पुजारियों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ पिछले दिनों विरोध प्रदर्शन किया था और दुकानें बंद कर दी थी। पंडा समुदाय और स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। दरअसल बदरीनाथ धाम मे आने वाले वीआईपी लोगों के कारण स्थानीय निवासियों और आम श्रद्धालुओं को घंटों लाइन में इंतजार करने को मजबूर होना पड़ता है। बदरीनाथ में स्थानीय निवासियों के द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन व बद्री केदार मंदिर समिति को बैकफुट पर आना पड़ा और वीआईपी दर्शन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

बदरीनाथ में हुए विरोध प्रदर्शन को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता शीशपाल बिष्ट का कहना है कि चारधाम यात्रा शुरू होने से पहले सरकार बड़े-बड़े दावे कर रही थी, लेकिन अब सरकार की व्यवस्थाओं की पोल खुलनी शुरू हो गई है। यात्रा के पहले 15 दिन सरकार ने कोई भी वीआईपी मूवमेंट करने से मना किया था, लेकिन खुद प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही दिन केदारनाथ पहुंच जाते हैं। जब सरकार अपने आदेशों का पालन नहीं कर सकती है तो फिर ऐसे आदेश क्यों जारी किए जाते हैं।

चारों धामों में शुरुआत से ही जिस तरीके से व्यवस्था चरमराई हुई है उससे लगता है कि सरकार ने पिछली चारधाम यात्रा से कुछ नहीं सीखा, जिस कारण प्रदेश की छवि पूरे देश में ख़राब हो रही है। वहीं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता कमलेश रमन का कहना है कि स्थानीय निवासियों का कोई भी विरुद्ध प्रदर्शन नहीं था बल्कि स्थानीय निवासियों और हक-हकूक धारियों द्वारा सुझाव दिए गए।

वीआईपी दर्शन से आम श्रद्धालुओं को परेशानी ना हो। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने वीआईपी दर्शन की व्यवस्था समाप्त करने के निर्णय की सरहाना करते हुए कहा कि मंदिर में आने वाली वीआईपी और आम नागरिकों के लिए भगवान के दर्शन एक समान होते हैं। लेकिन इस फैसले के बाद अब बदरीनाथ धाम में आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को परेशानी नहीं होगी।

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