एक कहावत है कि डायन भी 7 घर छोड़कर खाती है, अपने आस-पास के क्षेत्र का लिहाज करती हैं, लेकिन उत्तराखंड में सरकारी अधिकारी लिहाज नहीं करते हैं और कभी-कभी उनका किरदार बहुत ही आश्चर्यजनक हो जाता है। अब इसी को ले लीजिए कृषि मंत्री गणेश जोशी के विभागीय अधिकारी और कर्मचारी डायन के किरदार से भी डरावने नजर आ रहे हैं, क्योंकि उन्होंने कृषि मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में ही गरीब किसानों के हक पर डाका डालकर डेढ़ करोड़ का बंदरबांट कर दिया है। आश्चर्य इस बात को लेकर है कि कृषि विभाग के इन अधिकारियों ने मृतक किसानों को भी नहीं छोड़ा और उनके नाम पर भी पैसे हड़प लिए। उत्तराखंड में अब तक के सबसे अजीबो-गरीब घोटाले की ये बानगी हैं और राजधानी देहरादून में कृषि मंत्री की नाक के नीचे ये घोटाला हुआ है। इस मामले को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रदेश की डबल इंजन की सरकार पर हमला बोला है। विपक्ष का कहना है कि प्रदेश के मंत्री, अधिकारियों के आगे बौने साबित हो रहे हैं और यही वजह है कि अधिकारी जब चाहे तब ऐसे मंत्रियों को आंख दिखाने में जुटे रहते हैं। गणेश जोशी जैसे मंत्री को दबंग मंत्री के रूप में लोग जानते हैं, लेकिन ऐसे दबंग मंत्री का क्या करें जिसका डर अपने ही कर्मचारियों पर नहीं चल पा रहा है। ऐसा करके उत्तराखंड में सरकारी अधिकारी और कर्मचारी प्रदेश सरकार के भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को पलीता लगा रहे हैं। ये सबसे अलग और नया कारनामा कृषि मंत्री गणेश जोशी के विभाग का है। कृषि मंत्री के मातहत इतने निडर हो गए हैं कि उन्होंने मंत्री जोशी के विधानसभा क्षेत्र में ही भ्रष्टाचार कर डाला और गरीब किसानों के डेढ़ करोड़ डकार गए। मसूरी विधानसभा तक ही ये घोटाला नहीं सिमटा बल्कि डोईवाला विधानसभा क्षेत्र में भी ये घोटाला हुआ है। महत्वपूर्ण बात यह है कि जिस योजना में प्रधानमंत्री का नाम जुड़ा हुआ है और जहां सीधे पीएमओ कार्यालय से पैसा आ रहा है उस योजना में भी बड़े स्तर पर घोटालेबाजों ने घोटाला कर न केवल प्रदेश सरकार को बल्कि सीधे तौर पर पीएमओ को भी चुनौती दे डाली है कि आपको जो करना है करिए हम तो भ्रष्टाचार करते रहेंगे। चाहे आप किसी भी तरह की नीति लेकर आएं लेकिन हम उससे डरने वाले नहीं है।
हम आपको बताते हैं कि ये क्या मामला है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत 2022-23 यानी 31 मार्च 2023 से पहले देहरादून के रायपुर ब्लॉक में कृषि विभाग के कृषि भूमि सरंक्षण अधिकारी ने तकरीबन 200 किसानों के नाम पर भ्रष्टाचार किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत प्रति किसान तकरीबन एक से सवा लाख और सभी किसानों को मिला कर कुल तकरीबन डेढ़ करोड़ की योजना को केवल कागजों में अंजाम दे दिया गया गया और जबकि वास्तविकता में जिन किसानों के नाम पर यह योजना थी और जिनके नाम पर अनुदान दिया जाना था उन्हें इसकी खबर तक नहीं दी गई। किसानों के जाली हस्ताक्षर किए गए, यहां तक कि जो किसान अब जिंदा भी नही हैं उनके नाम पर भी बिलिंग हुई है और पैसा निकाल लिया है।
देहरादून के रायपुर ब्लॉक में मसूरी विधानभा क्षेत्र में पड़ने वाली न्याय पंचायत सरोना के सिल्ला गांव में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत कई किसानों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
मसूरी विधानसभा के रायपुर ब्लॉक में पड़ने वाली सरोना न्याय पंचायत के सिल्ला गांव के किसान किशोरी लाल के फर्जी हस्ताक्षर से शपथ पत्र बनाया गया है। उन्हें किसी तरह की किसी सिंचाई योजना का लाभ नहीं मिला है।
सिल्ला गांव की राजमती देवी साक्षर नहीं हैं, लेकिन शपथ पत्र में राजमती देवी के साइन किए गए हैं। उन्हें ना तो किसी तरह की किसी सिंचाई योजना की जरूरत है और न ही उन्हें कुछ मिला है।
सबसे आश्चर्य की बात है कि सिल्ला गांव के किसान रामप्रसाद जीवित नहीं हैं, लेकिन उनके नाम पर भी एक लाख 16 हजार की बिलिंग की गई है और इन्हें भी योजना में लाभार्थी बनाया गया है और इनका भी फर्जी हस्ताक्षर किया गया है।
रायपुर ब्लॉक के मसूरी विधानसभा के बाद डोईवाला विधानसभा में पड़ने वाले न्याय पंचायत थानों के बड़ासी गांव में अनुसूचित जाति के 80 वर्षीय बुजुर्ग किसान रोशन लाल के पास पानी की व्यवस्था नहीं है वो सिंचाई उपकरणों का क्या करेंगे। रोशन लाल बेहद बुजुर्ग हैं और उनके सत्यापन पत्र पर उनके साइन देखकर कोई भी हैरान हो जाएगा।
एक ही दिन में क्षेत्र के 200 किसानों का सत्यापन और एक ही वकील की साइन और मुहर अपने आपमें कई सवाल खड़े कर रहे हैं कि अधिकारी फील्ड में नहीं पहुंचे और उन्होंने केवल कागजी कार्यवाही पूरी की।
मामले में 4 से 6 अलग अलग कंपनियों की संलिप्तता, सभी कंपनियां एक ही व्यक्ति या रिश्तेदारों के होने की संभावना।
हालांकि इस मामले में सचिव कृषि विनोद कुमार सुमन ने रायपुर के कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी राज
देव पंवार को अनियमितता पर निलंबित कर दिया है।

देव पंवार को अनियमितता पर निलंबित कर दिया है।न्याय पंचायत प्रभारी वीरेंद्र सिंह नेगी और सेवानिवृत विकासखंड प्रभारी विनोद धस्माना से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
मुख्य कृषि अधिकारी लतिका सिंह को योजना का सत्यापन/ निरीक्षण न करने और अपने दायित्वों में लापरवाही करने के कारण 15 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।


