उत्तराखंड.

उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन की अपार संभावनाएं हैं। एक ओर जहां भारी तादाद में लोग प्रदेश में पर्यटन के लिए आते हैं तो वहीं पूरे देश से भारी संख्या में तीर्थ यात्री तीर्थ यात्रा पर पहुंचते हैं। ऐसे में उत्तराखंड के पहाड़ों में विकास की रेल को पहुंचाने के लिए इन दिनों प्रदेश में सबसे बड़े रेल परियोजना ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना का कार्य चल रहा है। इस परियोजना के पूरा होते ही उत्तराखंड के पहाड़ों में विकास की ‘ट्रेन’ भी गति पकड़ेगी और तीर्थ यात्रियों के साथ स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए यह एक बड़ा तोहफा होगा। उत्तराखंड आवास विभाग ने ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर आने वाले 11 स्टेशनों के 400 मीटर दायरे में सभी तरह के निर्माण पर रोक लगा दी है। इन क्षेत्रों को फ्रीज जोन घोषित किया गया है ताकि आने वाले दिनों में प्रदेश सरकार यहां पर संयोजित विकास के लिए मास्टर प्लान के तहत निर्माण कार्यों को अनुमति देगी।ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग के 125 किमी में से 105 किमी का मार्ग पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग के अंतर्गत है। अब तक भारत में इतनी लंबी सुरंग रेल मार्ग कहीं भी तैयार नहीं की गई है। ऐसे में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक का 80 फीसदी से ज्यादा का सफर टनल के अंदर से ही होकर गुजरेगा। पूरे प्रोजेक्ट के तहत 17 सुरंग, 12 स्टेशन और 35 पुलों का निर्माण किया जा रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पर बन रहे स्टेशनों योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, ब्यासी, सिराला, चिलगढ़ मल्ला, मलेथा, श्रीनगर, धारी देवी, तिलानी, घोलतीर और गौचर के 400 मीटर दायरे में किसी भी नए निर्माण या अन्य विकास की गतिविधियां रोक लगा दी गई है। इसी तरह से देहरादून के रायपुर में सेंट्रल विस्टा की तर्ज पर विधानभवन, सचिवालय, निदेशालयों के लिए भवन निर्माण होने हैं। यहां पर भी फ्रीज जोन घोषित किया गया है और इसके लिए भी यहां का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है।

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