प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात कार्यक्रम की 122वें एपिसोड में लोगों से बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में जीवन चंद्र जोशी के कला और जज्बे की दिल खोलकर तारीफ की। शारीरिक अक्षमता को मात देकर लकड़ी के बेजान टुकड़ों को कला का नायाब नमूना बनाने वाले जीवन की कहानी हर उस इंसान के लिए प्रेरणा है, जो मुश्किलों के आगे हार मान लेता है। उनकी उंगलियां जब लकड़ी को तराशती हैं, तो हर टुकड़ा उत्तराखंड की संस्कृति और परंपरा की कहानी कहने लगता है। चीड़ के पेड़ से गिरने वाली सूखी छाल से सुंदर कलाकृत्तियां बनाते हैं। वो छाल जिसे आमतौर पर लोग बेकार समझते हैं, जीवन के हाथों में आते ही वह धरोहर बन जाती है। पीएम मोदी के मन की बात में जीवन का नाम आते ही वह अचानक चर्चाओं में आ गए। हर कोई उनके बारे में जानने के लिए बेताब दिखा।

 

हल्द्वानी के कटघरिया निवासी जीवन जोशी काष्ठ कला यानी लकड़ी की कलाकारी के माहिर कलाकार हैं। खास बात यह है कि वे चीड़ के पेड़ की छाल से कलाकृतियां बनाते हैं, जिसे कुमाऊंनी भाषा में ‘बगैट’ कहा जाता है। इसी वजह से उन्होंने अपनी कला को ‘बगैट आर्ट’ नाम दिया है। जीवन जोशी इस बगैट आर्ट के जरिए लोक कलाओं, वाद्य यंत्रों और सांस्कृतिक प्रतीकों को आकार देते हैं। पीएम मोदी ने ‘मन की बात’ में उनके जीवन संघर्षों और उनकी अनोखी कलाकारी की खुलकर तारीफ की। पोलियो से ग्रसित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी, बल्कि अपने जज्बे से न सिर्फ खुद को साबित किया, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गए। जीवन चंद्र जोशी भारत के पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें चीड़ के बगेट यानी चीड़ के पेड़ की सूखी छाल पर काम करने के लिए भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा सीनियर फेलोशिप से नवाजा जा चुका है।

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