*देहरादून।* उत्तराखण्ड की भूस्खलन प्रबंधन विशेषज्ञता अब राज्य की सीमाओं से बाहर पहचान बना रही है। उत्तराखण्ड भूस्खलन न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केन्द्र (ULMMC) को पहली बार बाहरी राज्य की परियोजना में तकनीकी सेवाएं देने के बदले राजस्व प्राप्त हुआ है।
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित खारा हाइड्रो इलेक्ट्रिक परियोजना के भवन परिसर के पास भूस्खलन सक्रिय होने से सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया था। इसके समाधान के लिए यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने ULMMC से संपर्क किया। केन्द्र ने परियोजना की डीपीआर तैयार करने और निर्माण कार्य के तकनीकी पर्यवेक्षण का जिम्मा लिया।
जनवरी 2025 में केन्द्र की टीम ने स्थल का निरीक्षण कर भू-तकनीकी अध्ययन के आधार पर डीपीआर बनाई। निदेशक डॉ. शांतनु सरकार के मार्गदर्शन और सहायक अभियन्ता कौस्तुभ बड़थ्वाल के नेतृत्व में टीम ने यह कार्य पूरा किया। केन्द्र की संस्तुतियों के आधार पर भूस्खलन रोकथाम का कार्य अब अंतिम चरण में है।
19 अगस्त 2026 को डीपीआर और तकनीकी सेवाओं के लिए 04 लाख 21 हजार रुपये का चेक सचिव आपदा प्रबंधन एवं महानिदेशक ULMMC को सौंपा गया। स्थापना के बाद तकनीकी सेवाओं से अर्जित यह केन्द्र की पहली राजस्व प्राप्ति है।
सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि केन्द्र अब डीपीआर निर्माण, तकनीकी निरीक्षण और भू-वैज्ञानिक अध्ययन जैसी विशेषज्ञ सेवाएं दे रहा है। अब तक सिंचाई, लोक निर्माण सहित विभिन्न विभागों के लिए 8 से अधिक डीपीआर तैयार की जा चुकी हैं
