*देहरादून।* अंकिता भंडारी हत्याकांड में बुधवार को सभी आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय ने एक बार फिर खारिज कर दी। प्रदेश सरकार की ओर से की गई मजबूत पैरवी के चलते दोषियों को कोई राहत नहीं मिल सकी।
सरकार के अनुसार घटना के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया और गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। जांच में करीब 500 पन्नों की चार्जशीट और लगभग 100 गवाहों के बयान शामिल किए गए। मजबूत अभियोजन के कारण मुकदमे के दौरान भी आरोपियों को जमानत नहीं मिली और अंततः उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार पहले दिन से ही अंकिता को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। परिजनों की मांग पर तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए और माता-पिता की मांग पर सीबीआई जांच के आदेश भी दिए गए। पीड़ित परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के साथ दिवंगत अंकिता के भाई और पिता को नौकरी भी दी गई।
सरकार ने कहा कि इस संवेदनशील मामले में राजनीतिक आरोपों के बजाय न्यायिक प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई। त्वरित कार्रवाई, एसआईटी जांच और प्रभावी पैरवी के कारण दोषियों को कठोर सजा सुनिश्चित हो सकी।
