*हरिद्वार, 20 अप्रैल 2026*

हरिद्वार में हुए बहुचर्चित भूमि घोटाले में सरकार ने कड़ी कार्रवाई की सिफारिश की है। जांच के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ अब गाज गिरना तय माना जा रहा है।

 

शासन ने *त्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम IAS वरुण चौधरी* को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति केंद्र सरकार को भेज दी है। उन पर घोटाले में सीधी संलिप्तता का आरोप है।

 

वहीं *त्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह IAS* को अपने पदीय दायित्वों एवं कर्तव्यों के समुचित निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी माना गया है। उनके विरुद्ध “दीर्घ शास्ति” यानी मेजर पनिशमेंट अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है। इसमें पदावनति, वेतन वृद्धि रोकना या अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

 

*SDM पर भी कार्रवाई*

त्कालीन SDM *अजयवीर सिंह* के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने के साथ उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

 

*भूमि विक्रेता और नगर निगम के 6 अधिकारियों पर FIR*

आदेश में भूमि विक्रेताओं श्रीमती सुमन देवी, श्री जितेन्द्र कुमार, श्री अभिषेक यादव तथा श्री सुजीत कुमार सिंह के खिलाफ अभियोग दर्ज करने को कहा गया है।

 

इसके अलावा नगर निगम के तत्कालीन अधिकारियों पर भी एफआईआर होगी। इनमें वरुण चौधरी के साथ तत्कालीन सहायक नगर आयुक्त रविन्द्र कुमार दयाल, कर अधीक्षक लक्ष्मीकान्त भट्ट, सहायक अभियन्ता एवं प्रभारी अधिशासी अभियन्ता आनन्द सिंह मिश्राण, सम्पत्ति लिपिक वेदपाल तथा मानचित्रकार दिनेश काण्डपाल शामिल हैं।

 

*क्या था मामला*

हरिद्वार भूमि घोटाला नगर निगम की सरकारी जमीन की फर्जी रजिस्ट्री और अवैध बंदोबस्त से जुड़ा है। आरोप है कि सरकारी भूमि को मिलीभगत से प्राइवेट व्यक्तियों के नाम कर दिया गया, जिससे राजस्व को करोड़ों का नुकसान हुआ।

 

अब सभी आरोपियों के खिलाफ विजिलेंस/पुलिस में मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच शुरू होगी। IAS अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार किया जाएगा।

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