*देहरादून, 02 अगस्त 2026।* अगर आप अगस्त से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन की खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं, तो ये खबर आपके जेब के बजट को सीधे प्रभावित कर सकती है। देश की कई बड़ी कंज्यूमर कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने का फैसला किया है। आने वाले दिनों में डिटर्जेंट, साबुन, बर्तन धोने का बार, नमक, पेंट, टायर और कई दूसरे रोजमर्रा के इस्तेमाल के सामान महंगे हो जाएंगे।
कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कच्चे माल और फ्यूल की लागत में लगातार बढ़ोतरी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल, केमिकल और पैकेजिंग मटेरियल महंगा होने के कारण उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसी वजह से अब कंपनियों के पास दाम बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
*कौन-कौन से प्रोडक्ट होंगे महंगे*
1. *FMCG सेक्टर*: HUL, P&G, ITC जैसी कंपनियां डिटर्जेंट पाउडर, कपड़े धोने का साबुन, बर्तन धोने वाला बार और लिक्विड की कीमतें बढ़ाने जा रही हैं। टाटा, सुरेश और अन्य ब्रांड का पैकेट वाला नमक भी महंगा होगा।
2. *पेंट सेक्टर*: एशियन पेंट्स, बर्जर, इंडिगो पेंट जैसी कंपनियों ने टाइटेनियम डाइऑक्साइड और रेजिन महंगा होने का हवाला देते हुए पेंट की कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। घर की पुताई और रिनोवेशन कराने वालों को इसका सीधा असर पड़ेगा।
3. *ऑटो सेक्टर*: एमआरएफ, सीएट, अपोलो जैसी टायर कंपनियों ने रबर और सिंथेटिक केमिकल की कीमत बढ़ने के कारण टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर के टायर महंगे करने का ऐलान किया है।
4. *अन्य सामान*: इसके अलावा टूथपेस्ट, शैम्पू, बिस्किट, चाय-पत्ती जैसे कई दूसरे रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी 5% से 10% तक की बढ़ोतरी संभव है।
*कंपनियों ने क्या कहा*
कंपनियों के प्रवक्ताओं ने बताया कि पिछले 6 महीने में कच्चे माल की कीमत 12% से 18% तक बढ़ चुकी है। साथ ही ट्रांसपोर्टेशन और फ्यूल का खर्च भी बढ़ा है। लागत को बैलेंस करने के लिए कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है। कुछ कंपनियों ने छोटे पैक की कीमतें वही रखकर ग्रामेज कम करने का भी विकल्प अपनाया है, जिसे इंडस्ट्री की भाषा में “श्रिंकफ्लेशन” कहा जाता है।
*त्योहारी खरीदारी पर पड़ेगा असर*
अगस्त से रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी और फिर नवरात्रि-दिवाली का सीजन शुरू हो जाएगा। इस दौरान घरों में सफाई, पुताई और ग्रॉसरी की खरीदारी सबसे ज्यादा होती है। ऐसे समय में डिटर्जेंट, साबुन, पेंट और अन्य सामान महंगे होने से मध्यम वर्ग के परिवारों के महीने के बजट पर सीधा दबाव पड़ेगा। रिटेलर और दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक अब एक साथ ज्यादा सामान खरीदने के बजाय जरूरत के हिसाब से ही सामान लेंगे।
