*देहरादून, 7 अगस्त 2026*। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री *पुष्कर सिंह धामी* ने मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट बुनकरों और हस्तशिल्प कारीगरों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने बिच्छू घास से बने पारंपरिक वस्त्र भी खरीदे।
कार्यक्रम का आयोजन उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा किया गया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के कारीगर केवल उत्पाद नहीं बनाते, बल्कि उनमें प्रदेश की संस्कृति और लोकजीवन की आत्मा होती है। हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी-धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, रंगवाली पिछौड़ा और रिंगाल शिल्प जैसे उत्पाद अब राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ अभियान से राज्य के बुनकरों को नई पहचान मिल रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि प्रभावी ब्रांडिंग और विपणन से उत्तराखंड के पारंपरिक उत्पाद विश्व स्तर पर स्थापित होंगे।
राज्य सरकार द्वारा हथकरघा क्षेत्र को सशक्त बनाने के प्रयासों की जानकारी देते हुए CM धामी ने बताया कि *मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना* के तहत अब तक 278 बुनकरों-शिल्पियों को 4 करोड़ से अधिक का ऋण और 1 करोड़ से अधिक की सब्सिडी दी जा चुकी है। इससे 834 लोगों को रोजगार मिला है। इसके साथ ही प्रशिक्षण, आधुनिक मशीनें, डिजाइन और विपणन की सुविधाएं भी दी जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे खरीदारी में स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प खरीदना किसी बुनकर परिवार की आजीविका और सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है।
