*देहरादून।* मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वन अधिकारी केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ‘प्रकृति के प्रहरी’ हैं। वे इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाते हुए विकास को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
मंगलवार को देहरादून में भारतीय वन सेवा के परिवीक्षार्थियों के साथ संवाद कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने परिवीक्षार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तराखंड का 70 फीसदी भू-भाग वन है। यहां वनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के दौर में वन अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें आधुनिक तकनीक के साथ स्थानीय समुदायों के हितों को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। राज्य सरकार ने 13 हजार एकड़ वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां फॉरेस्ट ड्रोन फोर्स का गठन हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राजाजी टाइगर रिजर्व में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर 12 किमी लंबा एलिवेटेड वन्यजीव कॉरिडोर बनाया गया है। मानव-वन्यजीव संघर्ष में अनुग्रह राशि 10 लाख रुपये की गई है। वन पंचायतों को सशक्त बनाने और फायर वॉचर्स के जीवन बीमा जैसी पहल भी की गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ संकल्प के तहत पर्यावरण संरक्षण और विकास को साथ लेकर चला जा रहा है। युवा वन अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे राष्ट्रहित और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
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